समूह से जुड़कर सुनीता आदिवासी को मिल रहा है आगे बढ़ने का मौका

    जिले के आदिवासी विकासखण्ड कराहल के कस्बा ग्राम गोरस में रहने वाली सहरिया आदिवासी श्रीमती सुनीता पत्नी श्री रमेश आदिवासी दुर्गा स्वसहायता समूह से जुड़कर आर्थिक दिशा में रफ्तार पकड़ने का मौका प्राप्त हो रहा है। जिसमें वार्षिक रूप से 80 हजार रूपए की आमदनी प्राप्त कर सहरिया परिवारों में अपनी पहचान बनाने में सहायक बन रही है। 
    आदिवासी विकासखण्ड कराहल के ग्राम गोरस की श्रीमती सुनीता पत्नी श्री रमेश आदिवासी उम्र 32 वर्ष कक्षा 12वीं उत्र्तीण कर रोजगार की तलाश में इधर-उधर भटक रही थी। साथ ही दांपत्य जीवन में एक लड़का एवं दो लड़कियां प्राप्त होने के कारण पति श्री रमेश मजदूरी कर परिवार का भरण पोषण करने में असहायत महसूस कर रहे थे। इसी बीच मप्र डे आजीविका मिशन के कर्मचारी ग्राम गोरस में पहुंचे और स्वसहायता समूह गठित करने की दिशा में चैपाल पर चर्चा कर रहे थे। 
      कराहल विकासखण्ड के गोरस निवासी श्रीमती सुनीता आदिवासी ने बताया कि आजीविका मिशन के कर्मचारियों के बताए अनुसार मेरे द्वारा दुर्गा स्वसहायता समूह का गठन करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने इस समूह से गांव की अन्य महिलाओं को जोड़ने की कार्यवाही की। ग्राम में सबसे पढी लिखी होने के कारण शराब बंदी की दिशा में भी ग्रामीणों को समझाइश दी। साथ ही उनकी प्रेरणा से अधिकांश सहरिया परिवार शराब से तोबा कर गए। इसी प्रकार श्रीमती सुनीता आदिवासी की प्रेरणा से गांव की महिलाओं को दो बच्चों पर नसबंदी कराने की प्रेरणा दी।  
      ग्राम गोरस की रहने वाली श्रीमती सुनीता आदिवासी को आजीविका परियोजना के माध्यम से गोरस संकुल के 30 गांवों से जोड़ा जाकर संकुल का अध्यक्ष बनने का मौका मिला। श्रीमती सुनीता आदिवासी अपने गावं के 30 सहरिया परिवारो को आजीविका के माध्यम से जोड़ने की दिशा में निरंतर प्रयास किए। साथ ही सहरिया परिवारों केा अन्य गतिविधियों से भी जोड़ा जाकर आर्थिक रूप से संबंल प्रदान करने की दिशा में प्रयास किए गए। इन प्रयासों के माध्यम से श्रीमती सुनीता आदिवासी संभाग स्तर पर गठित एक मात्र महिला आजीविका ओद्योगिक सहकारी संस्था शिवपुरी के उपाध्यक्ष पद पर पहुंचकर अपनी समाज में पहचान बना रही है।  
   कराहल आदिवासी विकासखण्ड के ग्राम गोरस की रहने वाली श्रीमती सुनीता आदिवासी  ने बताया कि स्वसहायता समूह से हुए लाभ के चलते पति श्री रमेश आदिवासी को चपरासी की नौकरी शासकीय स्कूल में दिलाने का अवसर प्राप्त हुआ है। जिससे परिवार की आय में प्रतिमाह इजाफा हो रहा है। इसके अलावा डेयरी के लिए 70 हजार रूपए का ऋण लेकर अपनी आमदनी बढ़ाने में सहायक बन गई है। अब प्रतिवर्ष 80 हजार रूपए की आय सभी खर्चे निकालकर हो रही है। जिसके लिए मैं और मेरा परिवार मप्र सरकार, जिला प्रशासन और आजीविका मिशन का आभारी है। 
 


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