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Showing posts from September 16, 2019

ऑटो सेक्टर में मंदी के लिए ओला-उबर जिम्मेदार!

देश में इस वक्त ऑटो सेक्टर सबसे बड़े मंदी के दौर से गुजर रहा है. पिछले महीने देश में 21 सालों में सबसे कम कार बिकी. घरेलू बाजार में इस महीने कारों की बिक्री में 41 फीसदी से ज्यादा की गिरावट आई है. ऐसे में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण दलील दे रही हैं कि मिलेनियल आजकल गाड़ी खरीदने की जगह ओला-उबर को तवज्जो दे रहे हैं. ज्यादातर लोगों की सोच में बदलाव आया है जो अब मासिक किस्तों में एक कार खरीदने की जगह ओला और उबर जैसे टैक्सी सेवा का लाभ लेना पसंद करते हैं और यह आटो सेक्टर में मंदी के कई कारणों में से एक है. निर्मला सीतारमण, वित्तमंत्री ऑटो सेक्टर में मंदी को ओला-उबर से जोड़ने वाले वित्त मंत्री के इस बयान की विपक्ष से लेकर इंडस्ट्रलिस्ट तक आलोचना कर रहे हैं. देश के सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजुकी के एक टॉप अधिकारी ने कहा, भारत में कार खरीदने को लेकर विचारधारा में अभी भी कोई बदलाव नहीं आया है और लोग अपनी आकांक्षा के तहत कार की खरीदते हैं.   ' गाड़ियां कम बिक रहीं क्योंकि ट्रांसपोर्ट सिस्टम सुधरा ' परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने ऑटो सेक्टर में आर्थिक मंदी पर व

अकेले इंसान की जान

लंदन में  ये आदमी ख़ुदकुशी करने की ग़र्ज़ से छलांग लगाने जा रहा था। एक अजनबी आदमी ने उसे देखा और उसके पैर पकड़ लिए और उसे मनाता रहा के ऐसा ना करें। कुछ देर बाद कई और अजनबी लोग जमा होगये। किसी ने उसकी पतलून के बेल्ट को पकड़ा और किसी ने उसे रस्सी से बाँध दिया ताकि वो कूद ना सके। एक तरफ ऐसे समाज की तस्वीर है जहां एक भीड़ एक अकेले इंसान को बचा रही है। दूसरी तरफ एक ऐसा समाज बन चूका है जहाँ एक भीड़ एक अकेले इंसान की जान ले लेती है। इस भीड़ केलिए मारने केलिए धर्म, ज़ात या कुछ भी कारण बनता जा रहा है। जो समाज दुसरे इंसानों की क़द्र करता है वो फलता फूलता है और जो समाज दुसरे इंसानों की क़द्र नहीं करता वो तबाह ओ बर्बाद हो जाता है

एक नागरिक खतरे में है तो पूरा समाज व पूरा देश खतरे में है।

एक *चूहा* एक कसाई के घर में बिल बना कर रहता था। एक दिन *चूहे* ने देखा कि उस कसाई और उसकी पत्नी एक थैले से कुछ निकाल रहे हैं। चूहे ने सोचा कि शायद कुछ खाने का सामान है। उत्सुकतावश देखने पर उसने पाया कि वो एक *चूहेदानी* थी। ख़तरा भाँपने पर उस ने पिछवाड़े में जा कर *कबूतर* को यह बात बताई कि घर में चूहेदानी आ गयी है। कबूतर ने मज़ाक उड़ाते हुए कहा कि मुझे क्या? मुझे कौनसा उस में फँसना है? निराश चूहा ये बात *मुर्गे* को बताने गया। मुर्गे ने खिल्ली उड़ाते हुए कहा… जा भाई.. ये मेरी समस्या नहीं है। हताश चूहे ने बाड़े में जा कर *बकरे* को ये बात बताई… और बकरा हँसते हँसते लोटपोट होने लगा। उसी रात चूहेदानी में खटाक की आवाज़ हुई, जिस में एक ज़हरीला *साँप* फँस गया था। अँधेरे में उसकी पूँछ को चूहा समझ कर उस कसाई की पत्नी ने उसे निकाला और साँप ने उसे डस लिया। तबीयत बिगड़ने पर उस व्यक्ति ने हकीम को बुलवाया। हकीम ने उसे *कबूतर* का सूप पिलाने की सलाह दी। कबूतर अब पतीले में उबल रहा था। खबर सुनकर उस कसाई के कई रिश्तेदार मिलने आ पहुँचे जिनके भोजन प्रबंध हेतु अगले दिन उसी *मुर्गे* को काटा गया। कुछ

बागी नेता ने मोदी सरकार पर अर्थव्यवस्था को लेकर साधा निशाना

इंदौरः  पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और बीजेपी के बागी नेता यशवंत सिन्हा ने मोदी सरकार पर आर्थिक संकट को लेकर कड़ा प्रहार किया है। सिन्हा ने कहा कि मौजूदा वित्त मंत्री सीतारमण और पीयूष गोयल के हालिया बयान को लेकर तंज कसा है। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हए कहा कि सरकार में बैठे लोग अटपटे बयान दे रहे हैं। उनके इन बयानों से देश की अर्थव्यवस्था का हल नहीं होगा। इससे सरकार की छवि धूमिल होगी। सिन्हा ने कहा कि देश के ऑटोमोबाइल क्षेत्र की मंदी की पृष्ठभूमि में ओला और उबर जैसी ऑनलाइन टैक्सी सेवा प्रदाताओं को लेकर वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के हाल ही में दिए गए बयान पर आश्चर्य हुआ। उन्होंने सवालिया लहजे में कहा कि यदि ओला-उबर के चलते यात्री गाड़ियों की बिक्री में गिरावट आई, तो फिर दोपहिया वाहनों और ट्रकों की बिक्री में गिरावट क्यों आई? पूर्व वित्त मंत्री ने बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी के बयान पर भी निशाना साधा। गौरतलब है कि सुशील मोदी ने बयान दिया था कि सावन-भादों के चलते देश में मंदी का माहौल है। सिन्हा ने निर्यात बढ़ाने के लिए दुबई शॉपिंग फेस्टिवल की तर्ज पर भारत में सालाना